पंजीयक कार्यालय ने संजय शर्मा के शिक्षाकर्मी संगठन को जारी किया नोटिस……अनियमितताओं को लेकर लगा गंभीर आरोप!!

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रायपुर , 30 सितंबर 2019 । प्रदेश में शिक्षाकर्मी संगठनों के ऊपर पंजीयक फर्म्स एवं संस्था की पैनी नजर पड़ चुकी है और इसकी जद में सबसे पहले छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय शिक्षक संघ आया है जिसके प्रांताध्यक्ष संजय शर्मा थे। उन्होंने अपने संगठन को भंग करके नए संगठन छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन का निर्माण कर लिया है लेकिन पूर्व में हुई गड़बड़ियों को लेकर पंजीयक कार्यालय ने उन्हें नोटिस जारी करते हुए शुल्क के साथ 30 दिनों के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। जानकारी उपलब्ध न कराने की स्थिति में नियमानुसार आगामी कार्यवाही की जाने की चेतावनी भी दी गई है ।

संभवत: यह पहली बार है जब शिक्षाकर्मियों के संगठन के ऊपर प्रशासन की नजर पड़ी है क्योंकि शिक्षाकर्मी संगठन पंजीयक फर्म्स एवं संस्था से पंजीयन कराकर उससे जुड़े समस्त लाभ लेते हैं और पदाधिकारियों के स्थानांतरण होने पर इसे आधार भी बनाया जाता है लेकिन पंजीयक कार्यालय को संगठन द्वारा समय समय पर सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती। इस पत्र को ही देखें तो इसमें साफ लिखा गया है कि छतीसगढ़ पंचायत नगरी निकाय शिक्षक संघ जिसका पंजीयन क्रमांक 5093 था को 31 दिसंबर 2014 को पंजीकृत किया गया था; पंजीयन के बाद संस्था को 45 दिनों के भीतर कार्यकारिणी सूची, आम सभा कार्यवाही की प्रतिलिपि, सदस्यों की जानकारी फाइलिंग शुल्क के साथ जमा करना था।

इसी प्रकार प्रतिवर्ष समिति को लेखा-जोखा, आय-व्यय पत्रक, बैलेंस शीट भी जमा करना होता है, लेकिन 2014 से 2019 तक एक भी बार जानकारी पंजीयक कार्यालय के पास जमा ही नहीं की गई ।

शिक्षाकर्मी संगठनों पर हमेशा लगते रहे हैं गंभीर आरोप…

शिक्षाकर्मी संगठनों में राशि के गड़बड़झाले को लेकर हमेशा आरोप लगते रहते हैं, शिक्षाकर्मी संगठनों द्वारा अपने सदस्यों से सहयोग राशि वसूली जाती है लेकिन इसके विषय में न तो प्रदेश स्तर पर कभी श्वेत पत्र जारी किया जाता है और न ही पंजीयक कार्यालय को जानकारी दी जाती है; जबकि शासन के नियमानुसार संगठन को प्रतिवर्ष आय-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत करना चाहिए।

आमतौर पर माना जाता है कि संगठनों को लाखों रुपए की कमाई होती है क्योंकि शिक्षाकर्मियों की संख्या लाखों में है, ऐसे में एक संगठन के यदि हजारों में भी सदस्य हैं… तो उनकी साल भर की कमाई लाखों में है जबकि उस हिसाब से खर्च कुछ भी नहीं है और यदि खर्च है भी तो बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षकों से शासन प्रशासन भी यह उम्मीद लगाती है कि उनके द्वारा सही सही जानकारी प्रस्तुत की जाएगी।

मंत्रालय के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रशासन की नजर में पूरा गड़बड़झाला आ चुका है और आने वाले दिनों में इस पर कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है ।

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