नए भर्ती के पहले हो सभी शिक्षकों का संविलियन ,,,,,ऐसा नहीं हुआ तो वर्षों से कार्यरत शिक्षक हो जायेंगे जूनियर ,,,विभाग में फिर से होगी असमानता

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रायपुर : स्कूल शिक्षा विभाग की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के दूसरे दिन बताया गया कि व्यापम द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग में रिक्त पदों पर ली गई परीक्षाओं में से व्याख्याता के लगभग चार हजार पदों की भर्ती का परिणाम सबसे पहले घोषित होने वाला है। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारियों को व्याख्याताओं के शालावार और विषयवार रिक्तियों की जानकारी जल्द से जल्द संचालक लोक शिक्षण कार्यालय में प्रेषित करने के निर्देश दिए गए।

साथ ही यह भी बताया गया है कि जल्द ही नए पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी जिससे जिन शिक्षको का संविलियन नही हुआ है उनमें आक्रोष उत्पन्न हो रहा है साथ साथ असन्तोष व्याप्त है, क्योंकि नए भर्ती से जो शिक्षक पहले से शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे है वे सभी जूनियर हो जाएंगे, जो गलत है ।

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शालेय शिक्षाकर्मी संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने बताया कि किसी भी प्रकार की भर्ती करने से पहले शासन को पंचायत विभाग में कार्यरत शिक्षको का शिक्षा विभाग में पूर्ण संविलियन किया जाना चाहिए, ऐसा नही किये जाने पर विभाग में पुनः असमानता उत्पन्न हो जाएगी, टकराव की स्थिति निर्मित होगी। शासन को चाहिए ही जनघोषणा के अनुरूप सभी शिक्षको का संविलियन किया जाए।

शालेय शिक्षाकर्मी संघ ने बयान जारी करते हुए कहा है कि विभाग में जो भेदभाव लगभग समाप्त हो चुका है, पुनः ऐसी परम्परा की शुरुवात नही किया जाना चाहिए । अतः सरकार से अनुरोध है की ऐसे शिक्षक जो पंचायत विभाग में रहकर शिक्षा विभाग में लगातार अपनी सेवाएं दे रहे है उनकी सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए भर्ती के पूर्व सभी शिक्षक जिन्होंने सफलतापूर्वक दो वर्ष पूर्ण कर लिया है उनका संविलियन किया जाए। ज्ञातव्य है कि वर्तमान सरकार ने चुनावपूर्व जारी जन घोषणा पत्र में दो वर्ष पूर्ण कर चुके शिक्षको को तत्काल संविलियन की बात कही थी

यदि किसी भी तरह से नए भर्ती को अंतिम रूप दे कर शिक्षकों की भर्ती आनन फानन में कर भी दिया गया तो उन शिक्षकों का क्या होगा जो सात वर्षों से लगातार काम कर रहे है। आपको यहाँ जानना जरुरी  है कि यदि ऐसा होता है तो जो शिक्षक 2 से 7 वर्ष तक अपनी सेवा दे रहे है ओ भी नए भर्ती वाले शिक्षक से जूनियर हो जायेंगे। इतना ही नही वे आर्थिक रूप से भी पीछे हो जायेंगे क्योंकि अभी जो व्यवस्था है उसमे 8 वर्ष होने पर शिक्षकों का संविलियन शिक्षा विभाग में होता है।

यदि विभाग में समानता को ध्यान में रखकर ये निर्णय लिया जाय तो पहले से कार्यरत शिक्षकों पहले संविलियन किया जाये उसके बाद ही नए भर्ती के द्वारा पदों की पूर्ति किया जाय। नहीं तो अभी तक अपनी सेवा दे रहे शिक्षकों के साथ अन्याय होगा।

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