नियुक्ति के तत्काल बाद जिला महामंत्री ने दिया इस्तीफा, संजय शर्मा पर लगाई आरोपों की झड़ी…. पदाधिकारी नियुक्ति प्रक्रिया को खड़ा किया कटघरे में !

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रायगढ़, 01 सितंबर 19 छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय शिक्षक संघ का पंजीयन भंग करके नया संगठन छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन बनाने वाले संजय शर्मा की नियुक्ति और फिर उसके बाद उनके द्वारा बिना किसी प्रक्रिया के जिलाध्यक्ष बनाने को लेकर विवाद गहरा गया है।

किसी भी संगठन में आम सदस्य मिलकर सबसे पहले प्रांत अध्यक्ष को चुनते हैं और उसके बाद इसी तर्ज पर जिला और ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति होती है लेकिन शिक्षाकर्मी संगठनों की बात करें तो फिर चाहे कोई सा भी संगठन हो यहां की पूरी नियुक्ति प्रक्रिया ही इन सब नियमों से परे है।

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ताजा विवाद संजय शर्मा के संगठन से जुड़ा हुआ है जिसमें पुराने संगठन को भंग करके उन्हीं पदाधिकारियों को बुलाकर फिर से संजय शर्मा का मनोनयन कर दिया गया जबकि नियमानुसार यदि संगठन भंग कर दिया गया है तो फिर कोई किसी पद पर हो ही नहीं सकता बावजूद इसके पुराने जिला और प्रांतीय पदाधिकारियों को रायपुर बुलाकर संजय शर्मा का निर्वाचन कर दिया गया और उसके बाद बड़े ही नाटकीय ढंग से संजय शर्मा ने अन्य जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी जिसमें तमाम वही जिलाध्यक्ष है जो पिछले संगठन में बरसों से जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

उसके बाद जिला अध्यक्षों ने ब्लॉक अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों को नियुक्त करना शुरू कर दिया । आम शिक्षाकर्मी तो इसे लेकर लगातार सोशल मीडिया में आवाज उठा ही रहे हैं अब स्वयं चयनित होने वाले पदाधिकारी भी इस पर सवाल उठाने लगे हैं ।

ऐसे ही एक पदाधिकारी रायगढ़ के जिला महामंत्री अली अहमद ने पत्र लिखकर संजय शर्मा और उनके संगठन को कटघरे में खड़ा किया है सोशल मीडिया में अपने पत्र को वायरल करते हुए उन्होंने लिखा है कि–

“यह कैसी उलटी गंगा बह रही है महोदय ?….. ब्लॉक स्तर पर सभी शिक्षक मतदान के माध्यम से ब्लॉक अध्यक्ष चुनते हैं ब्लॉक अध्यक्ष जिला अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष प्रांत अध्यक्ष का चुनाव करते हैं; यही हमारे मूल संगठन का बाइलॉज रहा है । प्रजातांत्रिक व्यवस्था में हम चुनकर भेजेंगे जो आगे प्रदेश स्तर तक की बॉडी बनाएगा।”

संजय शर्मा जी के तुगलकी फरमान को मैं एक सिरे से नहीं मानता जहां शीर्ष के नेतृत्व से मेरी विचारधारा मेल नहीं खा रही वहां पदाधिकारी रहना अंदर ही अंदर घुटन के समान है ।
अतः मैं पूर्ण विवेक के साथ जिला महामंत्री पद से त्याग देने के साथ-साथ संगठन भी त्याग करता हूं ।

पंजीयन कार्यालय की चुप्पी सवालों के कटघरे में!

अब शिक्षाकर्मी संगठनों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे है । दशकों तक संगठन में पदाधिकारी रहे कई वरिष्ठ शिक्षाकर्मी नेताओ का आरोप है कि संजय शर्मा के छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय संगठन ने कभी संगठन के नाम से खाता खुलवाया ही नहीं, व्यक्तिगत खाते पर ही धनराशि जमा करते रहे और मनचाहा खर्च होता रहा जो कि बायलॉज के नियम के एकदम विपरीत है और इस स्थिति में पंजीयन कार्यालय के द्वारा कार्रवाई होनी चाहिए थी जबकि पूरे प्रदेश को पता है शिक्षाकर्मी संघ में करोड़ों रुपए का तो केवल चंदा ही जमा हो जाता है बावजूद इसके इस पूरे घालमेल पर पंजीयन कार्यालय द्वारा कोई कार्यवाही न करना समझ से परे है और कहीं न कहीं यह खुले भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है ।

भले ही संगठन का पंजीयन भंग कर दिया गया हो लेकिन जो गड़बड़ी हुई है उसकी जांच और उस पर कार्रवाई करना पंजीयन कार्यालय का ही दायित्व है। इसके बाद भी नए संगठन को पंजीयन दे देना और फिर उसकी कार्यप्रणाली पर किसी प्रकार का कोई नियंत्रण न होना यह बताता है कि राज्य में संगठनों को पंजीयन देने वाले कार्यालय का संगठनों पर कोई हस्तक्षेप नहीं है अब इसकी शिकायत पदाधिकारी राज्यपाल और मुख्यमंत्री से करने जा रहे हैं जिसके बाद मामला और गरमा सकता है ।

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