पुरानी पेंशन की लड़ाई में दो फाड़ हुए शिक्षक संघ….. संजय शर्मा ने थामा बी पी रावत का हाथ….बने छत्तीसगढ़ के प्रदेश संयोजक

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रायपुर -28सितंबर 2019 । लगता है 20 साल की लड़ाई के बाद भी शिक्षक संघों ने इससे कोई सीख हासिल नहीं की है यही वजह है कि पुरानी पेंशन की लड़ाई जो कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, वह भी प्रदेश में शिक्षक संघों की राजनीति के भेंट चढ़ने जा रहा है । जिस प्रकार शिक्षक संघ बंटते -बंटते 17 संघ हो गया है ऐसे ही पुरानी पेंशन का मांग भी कई संघों में बंटते जा रहा है।

देश में पुरानी पेंशन की लड़ाई जब शुरू हुई तो छत्तीसगढ़ में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी और प्रदेश भर के कर्मचारी धीरे-धीरे NMOPS नामक संगठन के साथ जुड़ने लगे जिसकी अगुवाई विजय बंधु कर रहे हैं बाद में कुछ व्यक्तिगत आरोप लगाकर बीपी सिंह रावत इनसे अलग हो गए और खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया बावजूद इसके प्रदेश के सभी कर्मचारी विजय बंधु के साथ ही खड़े नजर आ रहे थे खासतौर पर शिक्षक संघ के अनेक पदाधिकारी छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के साथ मिलकर संगठन को मजबूती देते आ रहे हैं।

अब उसमें भी सेंध लगाने की तैयारी शुरू हो चुकी है यही वजह है कि 14 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के द्वारा विज्ञप्ति जारी करके यह सूचना दी गई कि उनके तरफ से प्रतिनिधिमंडल को बीपी सिंह रावत की बैठक में भेजा जा रहा है और अब बीपी सिंह रावत की द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में जो कार्यकारिणी गठन की गई है उसमें छत्तीसगढ़ टीचर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा को छत्तीसगढ़ राज्य के लिए प्रदेश संयोजक घोषित कर दिया गया है यानी अब देश के बाद छत्तीसगढ़ में भी पुरानी पेंशन की लड़ाई कर्मचारी अलग-अलग लड़ते नजर आएंगे और इसे कहीं से भी सही नहीं कहा जा सकता ।

प्रदेश में शिक्षाकर्मियों की हमेशा आधी अधूरी जीत के पीछे की वजह भी इन्हीं मतभेदों को माना गया था और अब एक बार फिर पुराने पेंशन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर दो फाड़ होना यह साफ बताता है कि छत्तीसगढ़ के शिक्षक नेताओं में अपने साथियों के हित से कहीं ज्यादा स्वंय के हित का भाव छिपा हुआ है और पूरी लड़ाई ही पद को लेकर हो रही है जिसका खामियाजा अंत में आम कर्मचारियों को ही भुगतना पड़ेगा यह तय है ।

आम शिक्षकों को अब समझ में आने लगा है कि शिक्षक नेताओं को आम शिक्षकों का हित महत्वपूर्ण नहीं है ,उन्हें अपना पद ज्यादा प्यारा है।, यही कारण है कि अब OPS के मांग को कई संघों में बांटने की तैयारी कर ली गई है।

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