पदाधिकारियों के ट्रांसफर से शिक्षकों के संघ में खलबली,,सख्त विरोध की चेतावनी, सुनील पांडेय ने कहा खुद के घर में लगे तो आग; दूसरों के घर तो तमाशा…क्या इसी को सर्व जन हिताय और सर्व जन सुखाय कहते हैं?

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बिलासपुर, 08 अगस्त 19। ताजा मामला नारायणपुर जिला का है, जहां छत्तीसगढ़ पंचायत ननि शिक्षक संघ के नारायणपुर जिलाध्यक्ष अजय तिवारी का प्रशासनिक ट्रांसफर किया गया है। पदाधिकारियों के प्रशासनिक ट्रांसफर होने को लेकर संघ ने तल्ख लहजे में कहा है कि यदि ट्रांसफर निरस्त नहीं किया गया तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।


सहायक शिक्षक की ज्वलन्त समस्या से सरोकार रखने वाले नेता सुनील पांडेय ने कहा कि दुर्भावना पूर्ण ट्रांसफर उचित नहीं है किन्तु इससे पहले भी आम शिक्षकों एवं कुछ संघों के नेताओं का प्रशासनिक ट्रांसफर किया गया है, तब बाकी संघ के लोग न केवल चुपचाप तमाशा देख रहे थे…बल्कि चुटकियां लेने में भी पीछे नहीं रहे।

जब अपने लोगों की बारी आती है तब ये संघीय नेता नियमों और कानूनों की दुहाई देने लगते हैं।जब एक आम शिक्षाकर्मी परेशान होता है तब इनके ये तल्ख लहजे कहां गुम हो जाती है?? इनका रवैया कुछ इस तरह हो गया है कि अपने घर में लगे तो आग दूसरों के घर में तो तमाशा।

वास्तव में देखा जाए तो इनको अब सिर्फ और सिर्फ अपना दामन बचाने की जुगत है, सहायक शिक्षक एवं अन्य आम शिक्षकों की ज्वलन्त समस्याओं से कुछ खास लेना देना नहीं है। आज जिस तत्परता के साथ गलत परम्परा का विरोध किया जा रहा है, इतनी ही तत्परता सहायक शिक्षक (वर्ग03) के वेतन विसंगति के मामले में दिखाया गया होता तो आज सहायक शिक्षक खून के आंसू नहीं रो रहे होते।

दरअसल इसी साल जिला स्तर पर प्रशासनिक तबादले के नाम पर कई सौ शिक्षाकर्मियों का तबादला हुआ और शिक्षाकर्मियों ने अपना मन मार के शासन के आदेशानुसार नए स्थान पर पदभार भी ग्रहण किया इसमें कई संगठनों के पदाधिकारी भी प्रभावित हुए और आम शिक्षाकर्मियों का तो कहना ही क्या, लेकिन जैसे ही छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय शिक्षक संघ के नारायणपुर जिला अध्यक्ष का स्थानांतरण हुआ संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा और अन्य पदाधिकारी खुलकर सामने आ गए, जबकि इससे पहले हुए किसी भी स्थानांतरण का उन्होंने कोई विरोध नहीं किया।

यहां तक कि नारायणपुर में ही इससे पहले जो सूची जारी हुई थी उसमें भी कई शिक्षको का स्थानांतरण हुआ, उसे लेकर भी विरोध नहीं किया गया। लेकिन संशोधित सूची में जैसे ही संघ के जिलाध्यक्ष अजय तिवारी का नाम आया, वैसे ही संजय शर्मा और उनके अन्य पदाधिकारियों को यह पूरी पद्धति ही अन्यायपूर्ण नजर आने लगी और इसी को लेकर आम शिक्षाकर्मियों में जबरदस्त आक्रोश है कि आखिर हमारे नेता तभी क्यों जागते हैं, जब उनका हित प्रभावित होता है और वह खुलेआम पूछ रहे हैं… कि जब हमारा यानी कि आम शिक्षकों का ट्रांसफर हो रहा था तब आप कहां थे हुजूर ?

उस समय तो आपने किसी प्रकार का कोई विरोध नहीं किया। सोशल मीडिया में अब आम शिक्षाकर्मियों ने खुला विरोध करते हुए लिखना शुरू कर दिया है कि यदि प्रशासनिक स्थानांतरण रद्द होता है तो पूरे प्रदेश में जितने प्रशासनिक स्थानांतरण हुए हैं, वह सभी रद्द होना चाहिए या फिर किसी का भी नहीं ।

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