संगठन विस्तार एवं सेवा सत्कार में संगठन व्यस्त; इधर ट्रांसफर की पेंच में फंसे शिक्षकों के हौसले हो रहे पस्त,,,शिक्षक नेता योगेश पांडेय ने कहा यह कैसा शिक्षक सरोकार जो डर के मारे पड़ गए बीमार

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बिलासपुर, 13 सितंबर 2019। वर्तमान में राज्य के शिक्षक संगठन अपने संगठन के विस्तार एवं नव नियुक्त अधिकारियों के आवभगत, सेवा सत्कार में व्यस्त हैं, वहीं ट्रांसफर की पेंच में फंसे शिक्षकों के हौसले पस्त होते जा रहे हैं।


राज्य में शिक्षा विभाग से शिक्षकों के ट्रांसफर के दो लिस्ट जारी हो चुके हैं, साथ ही प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय ट्रांसफर सूची अलग से निकली है। समस्त प्रकार के ट्रांसफर में भारी अव्यवस्था देखने को मिली है जिसमें कई शिक्षकों का ट्रांसफर जिला शिक्षा अधिकारी के विकल्प पर कर दिया गया है, ऐसे शिक्षक सही जगह पोस्टिंग पाने के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। लगातार हो रही लेटलतीफी एवं सही जगह नहीं मिलने के कारण शिक्षक परेशान हैं और ऐसे समय में शिक्षक संगठन से बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनके द्वारा कोई पहल किया जाएगा किंतु शिक्षक संगठन, स्थानांतरण से आए अधिकारियों के स्वागत सत्कार में व्यस्त हैं या फिर अपने संगठन का विस्तार करने में लगे हुए हैं…, आम शिक्षकों की परेशानियों से उन्हें कोई सरोकार नहीं है।

इस विषय में चर्चा करने पर शिक्षक नेता योगेश पांडेय ने कहा कि संगठन शिक्षकों के हित के लिए होना चाहिए। यह खेद का विषय है कि राज्य के समस्त शिक्षक संगठन अधिकारियों की आवभगत में लगे हुए हैं, आम शिक्षकों की परेशानी उन्हें दिखाई नहीं दे रही है। आम शिक्षक अपने ट्रांसफर एवं पोस्टिंग को लेकर परेशान है।

“ये वही संगठन और पदाधिकारी हैं जो अपने पदाधिकारियों के स्थानांतरण होने पर हल्ला मचाने लगते हैं और आंदोलन तक की धमकी देते हैं किंतु आम शिक्षक एलबी के परेशानी से कोई लेना देना नहीं है। आम शिक्षक एलबी संवर्ग केवल इनके नेतागिरी के लिए भीड़ बढ़ाने और चंदा वसूली करने के लिए है।”

गौरतलब है कि नारायणपुर में वर्तमान में छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के नाम से जाने जाने वाले संगठन के जिलाध्यक्ष अजय तिवारी का स्थानांतरण उन्हीं के ब्लॉक के एक स्कूल से दूसरे स्कूल होने पर संगठन ने सर आसमान पर उठा लिया था और उन्हें प्रशासनिक स्थानांतरण नियम विरुद्ध नजर आने लगा था लेकिन इसके पहले और बाद में हुए कई प्रशासनिक स्थानांतरण को लेकर उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई क्योंकि इसमें उनके पदाधिकारी नहीं थे बल्कि आम शिक्षाकर्मी थे ….. यह बात और है कि शासन-प्रशासन की तरफ से स्पष्ट संकेत दे दिए गए हैं कि इस प्रकार की नेतागिरी संगठन के अन्य नेताओं को भी भारी पड़ सकती है और यही कारण है कि आंदोलन तक की धमकी देने वाले संगठनों का मुंह डर के मारे तत्काल बंद हो गया और पूरा मामला संगठन की तरफ से ठंडे बस्ते में चला गया।

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