शिक्षक नेता योगेश पांडेय का फेडरेशन से सीधा सवाल….. क्या हुआ आपकी बड़ी बड़ी बातों और वादों का?? अगस्त बीत गया लेकिन नहीं मिली सहायक शिक्षकों को वेतन विसंगति से निजात

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 बिलासपुर, 11 सितंबर 2019। शिक्षाकर्मी से शिक्षक बने शिक्षक एलबी संवर्ग में संगठनों के लग रहे नित नवीन बाजार एवं संघ बनाओ अभियान एवं झूठे वादों व राजनीतिक इरादों से आम शिक्षक अब उब चुके हैं । कभी कोई फार्म भरवाता है तो कभी कोई न्यूज़ चलवाकर बताता है कि फला समस्या का समाधान फला तारीख तक हो जाएगा किन्तु वास्तविकता यह है कि वक्त के साथ इनके किए हुए वायदे हमेशा बेबुनियाद और झूठा साबित हुआ है। इसी तरह न्यूज चलवाकर फेडरेशन के नेताओं ने बताया था कि अगस्त के अंतिम सप्ताह तक सहायक शिक्षकों के वेतन विसंगति की समस्याओं का समाधान हो जाएगा और सितंबर का महीना सहायक शिक्षकों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आने वाला है, किन्तु अगस्त तो क्या सितंबर का भी आधा महीना लगभग गुजरने वाला है अभी तक कोई सौगात नहीं मिली है….।


इस विषय पर चर्चा किए जाने पर शिक्षक नेता योगेश पांडेय ने फेडरेशन के नेताओं पर सीधा प्रहार करते हुए पूछा है कि आपके बड़े- बड़े वादों का आखिर क्या हुआ ? आपने तो कहा था कि अगस्त के अंतिम सप्ताह में सहायक शिक्षकों के वेतन विसंगति दूर हो जाएगा… इस संबंध में आपने सोशल मीडिया में खबरें भी चलवाई थी। बड़े- बड़े वादे आपने किया था किंतु अगस्त भी बीत गया और सितंबर महीना भी शुरू हो गया है, अभी तक आपकी उन वादों की पूरी होने की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही है। इस तरह एक बार फिर आप लोगों ने सहायक शिक्षकों को झूठे सपने दिखाकर ठगने का काम किया है। आखिर कब तक आप इसी तरह सहायक शिक्षकों को झूठे सपने दिखाते रहेंगे और अपनी राजनीति चमकाते रहेंगे ? अब तो बाज आईए।

योगेश ने कहा कि दरअसल फेडरेशन की पूरी राजनीति चंद महत्वाकांक्षी लोगों के महत्वाकांक्षा के कारण जनहित की लड़ाई ना होकर अब आपसी लड़ाई एवं पद की लड़ाई हो गई है। फेडरेशन के प्रांतीय नेता पद की होड़ में आपस में लड़ते नजर आ रहे हैं, ऐसे में आम सहायक शिक्षकों की भलाई क्या करेंगे। आम सहायक शिक्षकों को भी समझने की जरूरत है कि ऐसे लोगों के बहकावे में ना आएं। समय- समय आंदोलन की घोषणा कर देना कभी विधानसभा घेराव की चेतावनी दे देना तो कभी अन्य इसी प्रकार के घोषणा कर अंत समय में नाटकीय तरीके से आंदोलन को स्थगित कर देना फेडरेशन की फितरत रही है।

साल भर से ज्यादा समय हो गया है फेडरेशन का गठन हुए किंतु आज तक फेडरेशन के द्वारा ना तो कोई ठोस आंदोलन किया गया है और ना ही शिक्षाकर्मियों की कोई मांग पूर्ण करवाई गई है। कुछ किया गया है तो केवल और केवल सोशल मीडिया में झूठे प्रचार एवं पद की आपसी लड़ाई।

ऐसे ही एक और संघठन को आड़े हाथों लेते हुए योगेश ने कहा कि कुछ संगठन अब मातृ नही मात्र संगठन हो चले है, इनकी भी करनी और कथनी में जमीन आसमान का अंतर है। ये लोग भी अपनी साख बचाने और अपना पद बचाने की जुगत में लगे हैं, सहायक शिक्षकों की समस्या से इन्हें भी कोई सरोकार नही। घर बैठे ज्ञापन का खेल और व्हाट्सअप की राजनीति के आकाओं को कहना चाहूंगा कि बाज़ आइए ऐसे कारनामों से, वरना वो दिन दूर नही जब अपनी ऐसी मानसिकता की वजह से मुंह की खानी पड़े।

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