शिक्षाकर्मी एक बार फिर अपने मांगों के लिए हुए लामबंद ,समस्या बरक़रार ,ज्ञापन के साथ आंदोलन की तैयारी,

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रायपुर (ABDS News):- छत्तीसगढ़ में शिक्षा कर्मियों की समस्या दूर होने का नाम ही नहीं ले रहा है। चाहे वह समस्या कोई भी हो किसी का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। समस्याओं की बात करें तो काफी लम्बी सूचि है फिर भी कुछ समस्या इस प्रकार है :-समय पर वेतन नहीं मिलना ,एरियर्स , सर्विस बुक संधारण ,डी ए ,पदोन्नति,क्रमोन्नति ,अनुकम्पा नियुक्ति ,संविलियन  और न जाने कितनी समस्याएं है जिससे शिक्षाकर्मी वर्षों से जूझ रहे है।

समस्याएं अनेक:- अगर क्रम से समस्याओं का विश्लेषण करें तो फेरिस्त काफी लम्बी हो जाएगी ,कुछ प्रमुख समस्याओं पर नजर डालें तो उनमे से सबसे पहला समय पर वेतन नहीं मिलना है ,ये एक ऐसी समस्या है जो किसी भी कर्मचारी के लिए असहनीय है ,निश्चित ही ये भयानक और गम्भीर समस्या है। अपने वेतन के लिए महीनो इंतजार करना किसी भी कर्मचारी के लिए काफी मुश्किल वाली बात है। इस समस्या का समाधान शासन स्तर पर तुरंत करनी चाहिये।

पदोन्नति कब ?:-अगर पदोन्नति की बात करें तो इस ओर शासन स्तर पर केवल गोल मोल जवाब ही मिलता है ,कभी रोक लग जाती है ,कभी ऊपर से आदेश नहीं होने का बहाना ,कभी कुछ और। देखने में आया है कई साल से शिक्षाकर्मी एक ही पद में काम करते आ रहे है और वे सभी मानक को पूरा भी करते है लेकिन शासन को इस ओर कोई सुध नहीं है।

क्रमोन्नति कब ?:-क्रमोन्नति की समस्या तो सुलझने का नाम ही नहीं ले रहा है ,यहाँ पर अधिकारी तय ही नहीं कर पा रहे है की शिक्षाकर्मियों के सर्विस काल का निर्धारण कैसे किया जाय। अगर किसी अन्य विभाग की बात करें तो किसी कर्मचारी को पदोन्नति नहीं मिल पाता है तो उन्हें क्रमोन्नति का प्रावधान है लेकिन शिक्षाकर्मियों के लिए इन प्रावधान का कोई अमल नहीं हो रहा है।

भेदभाव पूर्ण संविलियन :-संविलियन की प्रक्रिया तो शुरू कर दिया गया है लेकिन उसमे भी वर्ष बंधन कर शिक्षाकर्मियों को दो भागों में बाँट दिया गया है जिससे एक ही स्कूल में काम करने वाले शिक्षाकर्मियों में भेदभाव की स्थिति बानी हुई है। इसके लिए आठ वर्ष का बंधन निर्धारित है जिसका विरोध भी इनके द्वारा किया जा रहा है।

डी ए का हिसाब :-महंगाई भत्ता समय में कभी मिलता ही नहीं। हालत ये है की कौन से महीने में कितना डी ए मिलना है इसका हिसाब लगाने के लिए विभाग के बाबुओं को नहीं मालूम है। कई मंहगाई भत्ता अभी तक शेष बचा हुआ है साथ ही कुछ मिला है तो उसका एरियर्स का पता नहीं है।

इन तमाम प्रकार के समस्याओं के समाधान के लिए शिक्षाकर्मी संघो के द्वारा योजना तैयार कर लिया गया है। और नए सत्र शुरू होते ही एक बार फिर से ज्ञापन और आंदोलन की स्थिति  सकती है।

बच्चों का नुकसान :- शासन और शिक्षाकर्मियों के इस लड़ाई में सबसे ज्यादा नुकसान जो होता है वह छोटे छोटे बच्चों का है ,निश्चित ही ये बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है। चाहे कोई भी पक्ष से हो समस्या का समाधान बहुत ही जरुरी है। क्योंकि समस्या बने रहने पर शिक्षक और बच्चों दोनों के लिए अच्छी खबर नहीं है।

इन नौनिहालों के भविष्य अधर में लटका हुआ नजर आता है ,क्योंकि ज्ञापन और आंदोलन से केवल समय बर्बाद हो रहा है कोई हल नहीं निकल रहा है। इस समस्या को संज्ञान में लेते हुए शासन को सोचने और व्यवस्था को सुधरने की आवश्यकता है तभी एक स्वच्छ समाज और संस्कृति की कल्पना की जा सकती है।

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