शिक्षाकर्मी तीन साल से कर रहे है महंगाई भत्ते का इन्तजार,,सुध लेने वाला कोई नहीं ,,,,,जुलाई में संविलियन हुए शिक्षा कर्मियों को भी अभी तक नहीं मिला वेतन

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रायपुर। प्रदेश में शिक्षा कर्मियों की की सुध लेने वाले कोई नहीं है क्योंकि आज भी शिक्षा कर्मियों को हर बार उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। चाहे वह कोई भी मेटर हो जैसे वेतन समय पर मिलने की बात हो ,DA देने  की बात हो या फिर पदोन्नति और क्रमोन्नति की बात हो। हे मामले में शिक्षा कर्मियों की उपेक्षा की जाती रही है और आज भी हो  रही है।

हाल ही में प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों की महंगाई भत्ता बढ़ाने का ऐलान किया है जो केवल आठ वर्ष या उससे अधिक वाले शिक्षकों को फायदा मिलेगा  और इससे निचे वालों के लिए किसी प्रकार की जिक्र नहीं है। इस संबंध में आपको पूरा विस्तार से बताते  है – एक तरफ जहां नियमित शिक्षक और 8 वर्ष की सेवा पूर्ण कर शिक्षाकर्मी के दायरे से निकल चुके शिक्षक एलबी हैं जिन्हें नियमित शिक्षकों के समान ही सारी सुविधाएं मिल रही हैं, तो वही एक तरफ बेबस वह शिक्षाकर्मी भी हैं जिन्हें 3 साल से महंगाई भत्ता तक नहीं दिया गया है ।

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हर छह माह में घोषित होने वाली महंगाई भत्ता की घोषणा राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए तो होती है किंतु पंचायत के शिक्षाकर्मियों के लिए जुलाई 2016 के बाद से अभी तक महंगाई भत्ता की घोषणा नहीं हुई है।  ऐसे में उनके वेतन में इजाफा ही नहीं हो पा रहा है ऐसे भी महज 12 से 15 हजार के बीच में सेवा दे रहे पंचायत के शिक्षाकर्मी महंगाई भत्ते के जरिए अपने वेतन में थोड़े बहुत इजाफे की उम्मीद रखते हैं लेकिन बीते 3 सालों से यह उम्मीद भी खत्म हो गई है।

ऐसा नहीं है कि इसके लिए उन्होंने आवाज नहीं उठाई है लेकिन उनकी आवाज को सुनने वाला कोई नहीं है शायद यही वजह है कि चाहे मामला स्थानांतरण का हो या महंगाई भत्ते का, पंचायत के शिक्षाकर्मियों की ओर किसी का ध्यान जा ही नहीं रहा है और जो बुनियादी सुविधाएं शासन प्रशासन से शिक्षाकर्मियों को मिलनी चाहिए वह उसके भी मोहताज हो गए हैं।

जुलाई में संविलियन पाने वाले शिक्षाकर्मियों को नहीं मिला है अभी तक वेतन

शिक्षाकर्मियों की दुर्दशा कैसी है उसे इस बात से समझा जा सकता है कि 1 जुलाई 2019 को संविलियन होने वाले शिक्षाकर्मियों को अभी तक जुलाई माह का वेतन नहीं मिला है जबकि यह 1 अगस्त को मिल जाना था। आलम यह है कि संविलियन का लाभ पाने वाले व्याख्याता पंचायतों का अभी तक डीपीआई द्वारा संविलियन आदेश ही जारी नहीं किया गया है जो कि स्कूल शिक्षा सचिव द्वारा जारी किए गए समय सारणी के अनुसार 30 जुलाई को ही मिल जाना था।

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एक तरफ शिक्षाकर्मियों पर जहां कार्मिक संपदा को भरने का दबाव है वही बिना संविलियन आदेश क्रमांक के वह कार्मिक संपदा कैसे भरेंगे इस पर भी अपने आप में प्रश्नचिन्ह हैं। इधर डीडीओ इन सब के अभाव में बिल जनरेट करने में खुद को असमर्थ बता रहे हैं और इन सब के फेर में यदि कोई पीस रहा है तो वह है शिक्षाकर्मी, जिसे समझ ही नहीं आ रहा है कि संविलियन फिलहाल उसे लाभ पहुंचा रहा है या नुकसान ।

इस मुद्दे पर जब हमने शिक्षाकर्मियों की समस्या को लगातार उठाने वाले शिक्षाकर्मी नेता विवेक दुबे से बात की तो उनका कहना है

“शिक्षाकर्मियों के साथ लगातार सौतेला व्यवहार हो रहा है बीते 3 सालों से हमें महंगाई भत्ता नहीं दिया गया है जब राज्य के कर्मचारियों को महंगाई भत्ता दिया जा रहा है तो फिर पंचायत के शिक्षाकर्मियों के लिए इस पर रोक क्यों लगाई गई है यह समझ से परे है । ऐसा ही भेदभाव हमारे साथ स्थानांतरण में भी किया गया और संविलियन की प्रक्रिया को पूर्ण करने को लेकर भी शासन-प्रशासन का ढीला ढाला रवैया आहत करने वाला है । न तो अभी तक जुलाई में संविलियन प्राप्त करने वाले शिक्षाकर्मियों को वेतन मिला है और न ही डीपीआई से व्याख्याता पंचायतों का संविलियन आदेश जारी हुआ है , ऐसा लग रहा है मानो शिक्षाकर्मियों को सब भूल ही गए हैं जो कि बहुत ही आहत करने वाली स्थिति है”

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