संविलियन दिवस को लेकर शिक्षाकर्मियों में जबरजस्त आक्रोश…….बड़ा वर्ग कर रहा है सीधा विरोध…….सोशल मीडिया में कर रहे हैं तीखा प्रहार

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सूरजपुर 29.06.19 । छत्तीसगढ़ न.नि.शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष के घोषणा के पश्चात पुरे प्रदेश में 1 जुलाई को संविलियन दिवस के रूप में मनाने की तैयारी किया जा रहा है जिसका आम शिक्षाकर्मियों ने कड़ा विरोध करते हुए सोशल मीडिया में मोर्चा खोल दिया है।संजय शर्मा खुद सोशल मीडिया में सफाई देते हुए नजर आ रहे हैं किन्तु लोगों के सवालों के तीर लगातार जारी है।

शिक्षाकर्मियों ने सोशल मिडिया के माध्यम से सवालों बौछार करते हुए लिखा है कि 1 जुलाई ऐतिहासिक दिन है लेकिन क्या इसे इस तरह प्रदर्शित करने का यह उचित समय है वह भी तब जब हमारे हजारों साथी आज भी संविलियन से वंचित हैं।

संविलियन दिवस मनाने से क्रोधित शिक्षाकर्मियों का कहना है कि क्या इस बार भी हम परिचर्चा में शामिल होने वाली भीड़  बनेंगे आपके पदोन्नति के लिए और आपके अन्य मांग जो बच गया होगा , उसे पूरा करवाने के लिए।

आज आप जिस सम्पूर्ण संविलियन की बात कर रहे हैं कि सम्पूर्ण संविलियन की मांग करना है , इससे पहले आपने क्यों ध्यान नहीं दिए ।संविलियन की मांग को सरकार तक पहुंचाने का सबसे बेहतर समय तो लोकसभा चुनाव के पहले था।

संविलियन दिवस का विरोध इसलिए क्योंकि यह केवल आपका और आपके संघ का शक्ति प्रदर्शन है आम शिक्षक साथियों को इससे कुछ लाभ होने वाला नहीं खासकर सहायक शिक्षक एलबी और संविलियन से वंचित को तो बिल्कुल भी नहीं।

आप राज्य भर में क्रमोन्नति अभियान चलाते हैं,ओल्ड पेंशन अभियान चलाते हैं लेकिन संविलियन और वेतन विसंगति के लिए केवल ज्ञापन देते हैं इसके लिए कभी कोई अभियान क्यों नहीं चलाया आपने। संविलियन से अनेक लाभ हुआ होगा लेकिन आपको हमें नहीं हमारा तो वेतन विसंगति आज भी है।हमारे साथी संविलियन से वंचित आज भी हैं।

संविलियन प्राप्त माना रहे संविलियन जश्न।जो छूट गए उनका आज भी बदहाली का हश्र।।

जिन्हे संविलियन की सौगात मिली वह अपने सौगात की खोज में आगे बढ़ गया लेकिन जिन्हें संविलियन की सौगात नहीं मिल पाई वो आज भी बदहाली की जिंदगी में संविलियन की बाट जोह रहा है। संविलियन को उत्सव की तरह मनाने वाले लोग वही हैं, जिन्होंने कभी कहा था…

कोई शिक्षाकर्मी छूटे ना,
कोई साथी टूटे ना।
सभी का होगा संविलियन,
कोई साथी रूठे ना।।

अब बदहाल जिंदगी गुजार रहे शिक्षाकर्मी जिन्हें बीच मझधार में छोड़ उन्हीं के साथी संविलियन उत्सव मना रहे हैं, कैसे न रूठे और कैसे ना टूटे….?

इस विषय पर बात करने पर संविलियन से वंचित शिक्षाकर्मियों ने कहा कि हम आज भी संविलियन से वंचित हैं… हमें तीन-तीन चार -चार महीने तक वेतन नहीं मिलता…!! हड़ताल के समय तो आवाज दो हम एक हैं… कहा करते थे किन्तु आज हमें हमारे हाल पर छोड़ कर हमारे साथी जश्न मनाने की तैयारी कर रहे हैं; यह जले पर नमक रगड़ने से कम नहीं है।

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