03 नवम्बर के आंदोलन को ‘स्वायत्तशासी कर्मचारी संघ’ का समर्थन-राजधानी में होगा अधिकार रैली

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रायपुर -प्रदेश में लंबे समय तक कर्मचारी हित में संघर्ष करने वाले “छत्तीसगढ स्वायत्तशासी कर्मचारी संघ” के प्रदेश महामंत्री रामअवतार साहू एवँ संघ के प्रांताधयक्ष ने 03 नमवबर को राजधानी रायपुर में प्रस्तावित एक दिवसीय ध्यानाकर्षण रैली को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।

समर्थन के साथ ही साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों से भारी संख्या में कर्मचारीयो के आंदोलन में आने का अपिल किया है और उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा छत्तीसगढ प्राथमिक शिक्षक फैडरेशन का आंदोलन जायज है यथा शीघ्र प्रदेश सरकार शिक्षको के मांगो को पूरा कर, तत्काल राहत प्रदान करने का आग्रह माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी से किया।

छत्तीसगढ स्वायत्तशासी कर्मचारी संघ” ने जन घोषणा पत्र का हवाला देते हुए सबका संविलियन, क्रमोननत वेतनमान, अनुकंपा नियुक्ति, वेतन विसंगति जैसे बहुप्रतिक्षित मांग को शीघ्र पूरा करने माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी का ध्यानाकर्षण अपने समर्थन वक्तवय से कराया  तथा संख्या बल के साथ राजधानी पहुंचने का आशवासन दिया गया है।

अतः आप सभी साथियों से विनम्र निवेदन है कि आप सभी साथीगण, अपने पूरे संगठन के समस्त सदस्यों सहित उक्त आंदोलन में बढ़चढ़ कर भाग लेवें व प्रदेश के 1,80,000 शिक्षक साथियों की मांग एवँ आवाज को बुलंद करेंगे।

साथियों, आप सभी जानते है कि आज प्रदेश के 1,09,000 प्राथमिक शिक्षक साथीगण सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान झेल रहे है। प्रत्येक वर्ग 03 को वेतन विसंगति के कारण आज प्रत्येक माह दस, बारह, पन्द्रह एवँ अट्ठारह हजार तक का बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

चूंकि मध्यप्रदेश सरकार ने प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता की गणना करते हुए 12 वर्ष में प्रथम एवँ 24 वर्ष में द्वीतीय क्रमोन्नति वेतनमान देना शुरू कर दिया है। परन्तु छत्तीसगढ़ सरकार अब तक अपने कान में तेल डालकर सोई हुई है। जबकि मध्यप्रदेश सरकार की शिक्षाकर्मी भर्ती नियम एवँ सेवा शर्ते ही छत्तीसगढ़ राज्य में लागू हुई है।

अब जब मध्यप्रदेश में क्रमोन्नति मिलनी शुरू हो गई है तब ऐसे में यंहा भी क्रमोन्नति मिलनी ही चाहिए। चूंकि मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति छत्तीसगढ़ से भी बदतर है। छत्तीसगढ़ राज्य आज धन धान्य व आर्थिक रूप से पूरी तरह सम्पन्न है। यंहा बिजली, कोयला, जल, जंगल, जमीन पर्याप्त व भरपूर मात्रा में है। फिर भी मध्यप्रदेश की अपेक्षा यंहा के शिक्षको से अन्याय समझ से परे है।

चूंकि चार सूत्रीय मांगों में से क्रमोन्नति, वर्ष बन्धन एवँ अनुकम्पा नियुक्ति ये तीनो ऐसी मांगे है जिनका लाभ शिक्षाकर्मी वर्ग एक, वर्ग दो एवँ वर्ग तीन सभी को मिलना है।

चार सूत्रीय मांगों के लिए बजट की बात करना या बजट की प्रतीक्षा करना बेईमानी होगी क्योंकि आप सबको हम सबको याद है कि पूर्ववर्ती रमन सिंह सरकार ने जब हम सब के संविलियन की घोषणा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के आगमन पर अम्बिकापुर में मई 2018 में किया उस समय किसी प्रकार की बजट की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी थी।

इसी प्रकार जून 2018 में हमारे संविलियन का मसौदा पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने लाया तब भी किसी प्रकार की सालाना बजट का इंतजार करना नहीं पड़ा था। सीधे संविलियन की घोषणा हुई और जुलाई 2018 में संविलियन हो गया तथा अगस्त 2018 से वेतन मिलना शुरू हो गया।

ऐसे में अभी भी किसी प्रकार के फरवरी बजट के इंतजार की जरूरत ही नहीं है। सीधे सरकार घोषणा करें और वेतन मिलना शुरू हो।

अतः आप सभी आदरणीय साथियों से आग्रह है कि आप सभी साथीगण अपने संघ-संगठन के समस्त पदाधिकारियों व समस्त सदस्यों सहित उक्त 03 नवम्बर, रविवार के आंदोलन एवँ हड़ताल में बढ़चढ़ कर भाग लें व हड़ताल का पूर्ण समर्थन करेंगे।

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