व्याख्याता एलबी के बीईओ बनने पर इतनी मिर्ची क्यों ? पूर्व में उच्च वर्ग शिक्षक,प्रधान पाठक एवं व्याख्याता भी बनते थे अधिकारी ,तब कहाँ थे विरोध करने वाले

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बिलासपुर AbdsNews –बिलासपुर जिला के गौरेला विकास खंड में जब से विकास खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर व्याख्याता एलबी को पदस्थ किया है तब से पुराने रेगुलर शिक्षकों के आँखों में खटकने लगा है। उक्त पदस्थापना से नाराज बहुत से शिक्षक आंदोलन पे उतारू हो गए है।  जबकि पूर्व समय में मिडिल प्रधान पाठक,उच्च वर्ग शिक्षक एवं व्याख्याता को भी विकास खंड शिक्षा अधिकारी बनाया जाता था तब अभी विरोध करने वाले उस समय कहाँ थे।

शिक्षा कर्मियों का पुराने शिक्षक साथियों ने ज्यादातर विभिन्न मुद्दों पर हमेशा विरोध किया है।चाहे  प्रधान पाठक,व्याख्याता, प्राचार्य के पदों में पदोन्नति के मांग पर हो,चाहे शाला स्तर पर सीनियर शिक्षाकर्मी (अब शिक्षक एलबी)के अंडर काम करने के आदेश का विरोध हो । शिक्षाकर्मी और पुराने शिक्षक साथी एक ही विभाग,एक ही जगह पर सामान कार्य करने के बावजूद शिक्षाकर्मी को बराबर सम्मान नहीं मिला।

शिक्षाकर्मियों का शिक्षा विभाग में संविलयन होने पर आपसी भेदभाव दूर होने का अनुमान था। लेकिन गौरेला विकास खंड के शासकीय उच्तर माध्यमिक विद्यालय पाकलिया में पदस्थ गिरीशचंद्र लहरे व्याख्याता एलबी संवर्ग को बीईओ बनाया गया है तब से पुराने शिक्षक विरोध करने लगे है। जबकि पूर्व समय में भी कनिष्ठ शिक्षकों को बीईओ बनाया जाता रहा है। इस प्रकार से शिक्षाकर्मियों से शिक्षक बने साथियों का अधिकारी बनने पर विरोध करना भेदभाव को दर्शाती है।

गौरेला बीईओ बनाये जाने पर एलबी संवर्ग के शिक्षकों में ख़ुशी का माहौल है। क्योंकि आगे प्रधान पाठक एवं प्राचार्य के पदों में पदोन्नति का रास्ता खुल जायेगा। पूर्व सेवा अवधि की गणना होने पर क्रमोन्नति भी मिलने लगेगा। एक ही पद में 20 वर्षों से पदस्त शिक्षकों का क्रमोन्नति प्रमुख मांग भी है। पुराने शिक्षकों द्वारा विरोध प्रदर्शन करने पर बहुत से शिक्षक संगठनों ने प्रतिक्रिया देते हुए इस प्रकार का विरोध प्रदर्शन करने की कड़ी निंदा की है।

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